रूस और किर्गिस्तान के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के उद्देश्य से, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सादिर जापारोव ने आज फोन पर एक उच्च-स्तरीय वार्ता की। इस बातचीत का मुख्य केंद्र दोनों देशों के बीच व्यापार, आर्थिक निवेश और चल रही संयुक्त परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा करना था।
आर्थिक सहयोग और व्यापारिक लक्ष्य
क्रेमलिन द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय व्यापार में हो रही निरंतर वृद्धि पर संतोष व्यक्त किया। गौर करने वाली बात यह है कि दोनों देशों ने आपसी व्यापार को $5 बिलियन (लगभग 42,000 करोड़ रुपये) के पार ले जाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है।
बातचीत के मुख्य बिंदु:
- संयुक्त परियोजनाएं: ऊर्जा, कृषि और परिवहन बुनियादी ढांचे (Infrastructure) के क्षेत्र में चल रही रूसी परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति पर चर्चा हुई।
- शंघाई सहयोग संगठन (SCO): चूंकि किर्गिस्तान इस समय SCO की रोटेटिंग चेयरमैनशिप संभाल रहा है, पुतिन और जापारोव ने इस क्षेत्रीय मंच के भीतर समन्वय बढ़ाने पर भी सहमति जताई।
- राष्ट्रीय मुद्रा में भुगतान: दोनों नेताओं ने पश्चिमी प्रतिबंधों के बीच आपसी व्यापार को डॉलर के बजाय अपनी राष्ट्रीय मुद्राओं (रूबल और सोम) में करने की दिशा में हुई प्रगति की सराहना की।
क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षा
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और वैश्विक उथल-पुथल के बीच, दोनों राष्ट्रपतियों ने मध्य एशिया (Central Asia) में स्थिरता बनाए रखने के महत्व पर जोर दिया। पुतिन ने किर्गिस्तान को एक विश्वसनीय सहयोगी बताते हुए सुरक्षा और सैन्य-तकनीकी सहयोग को और गहरा करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
सांस्कृतिक और मानवीय संबंध
वार्ता के दौरान रूसी भाषा की स्थिति पर भी चर्चा हुई। पुतिन ने किर्गिस्तान में रूसी भाषा को दिए गए ‘विशेष दर्जे’ के लिए जापारोव का आभार व्यक्त किया, जिससे दोनों देशों के नागरिकों के बीच व्यापार और शिक्षा के क्षेत्रों में काम करना आसान हो गया है।
“रूस और किर्गिस्तान केवल पड़ोसी नहीं, बल्कि समय की कसौटी पर खरे उतरे रणनीतिक साझेदार हैं। हमारा आर्थिक सहयोग इस क्षेत्र की समृद्धि की आधारशिला है।” > — रूसी राष्ट्रपति कार्यालय (क्रेमलिन) का संदेश
भविष्य की रणनीति
दोनों नेताओं ने निकट भविष्य में व्यक्तिगत रूप से मिलने और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों (जैसे CSTO और CIS) के दौरान बातचीत जारी रखने पर सहमति जताई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह वार्ता रूस के ‘यूरेशियन एकीकरण’ के विजन को और मजबूती प्रदान करेगी।





