फ्रांस के सुरम्य शहर ब्रिटनी (Brittany) में संपन्न हुई G7 विदेश मंत्रियों की बैठक में भारत ने एक बार फिर वैश्विक कूटनीति में अपनी बढ़ती धमक का अहसास कराया। विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में पहुंचे भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने वैश्विक ऊर्जा संकट के मुद्दे पर भारत का कड़ा और तर्कसंगत पक्ष रखा। उन्होंने स्पष्ट किया कि विकसित देशों के कड़े प्रतिबंधों और भू-राजनीतिक (Geopolitical) दबाव के बीच, भारत अपने नागरिकों की ऊर्जा जरूरतों से समझौता नहीं करेगा।
पश्चिमी प्रतिबंधों और भारतीय हितों के बीच संतुलन
बैठक के प्रमुख सत्र, “वैश्विक चुनौतियां और ऊर्जा सुरक्षा,” में बोलते हुए डॉ. जयशंकर ने कहा कि दुनिया एक “अभूतपूर्व दोहरे संकट” का सामना कर रही है। एक तरफ यूक्रेन और मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्षों के कारण ऊर्जा की कीमतें आसमान छू रही हैं, तो दूसरी तरफ कड़े पश्चिमी प्रतिबंधों ने ग्लोबल सप्लाई चेन को अस्त-व्यस्त कर दिया है।
जयशंकर के संबोधन के 4 मुख्य स्तंभ:
- ऊर्जा सुरक्षा = नागरिकों की सुरक्षा: डॉ. जयशंकर ने जोर देकर कहा कि भारत जैसे विकासशील देश के लिए ‘ऊर्जा सुरक्षा’ केवल आर्थिक मुद्दा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय और मानवीय सुरक्षा का विषय है। उन्होंने कहा, “करोड़ों भारतीय नागरिकों को सस्ती और निरंतर बिजली प्रदान करना मेरी सरकार की पहली प्राथमिकता है।”
- दोहरे मापदंडों पर सवाल: विदेश मंत्री ने परोक्ष रूप से पश्चिमी देशों (विशेषकर यूरोप) के दोहरे मापदंडों पर सवाल उठाए। उन्होंने संकेत दिया कि जब यूरोप अपनी जरूरतों के लिए रूसी गैस का आयात जारी रख सकता है, तो भारत पर कड़े प्रतिबंधों के पालन का दबाव डालना अनुचित है।
- बाजार की वास्तविकता: भारत ने स्पष्ट किया कि जब तक वैश्विक बाजार अस्थिर है और प्रतिबंधों के कारण तेल की कीमतें $120 के पार हैं, भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए “सबसे किफायती और विश्वसनीय” स्रोतों की तलाश जारी रखेगा। विशेषज्ञों के अनुसार, यह रूस और ईरान से तेल आयात जारी रखने का सीधा संकेत है।
- ग्रीन एनर्जी ट्रांसिशन: जयशंकर ने ‘इंटरनेशनल सोलर अलायंस’ (ISA) का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत नवीकरणीय ऊर्जा की ओर तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन ‘नेट जीरो’ के लक्ष्य को पाने के लिए विकसित देशों को ‘क्लाइमेट फाइनेंस’ और ‘टेक्नोलॉजी ट्रांसफर’ के अपने वादों को पूरा करना होगा।
G7 देशों की प्रतिक्रिया
जयशंकर के बेबाक और तर्कसंगत पक्ष को G7 के कई सदस्यों (विशेषकर फ्रांस और जर्मनी) ने ध्यान से सुना। सूत्रों के अनुसार, बैठक के अंत में जारी ‘ज्वाइंट स्टेटमेंट’ में भारत की चिंताओं को शामिल किया गया और ऊर्जा बाजारों की “स्थिरता और पारदर्शिता” बनाए रखने की बात कही गई। हालांकि, कुछ प्रतिबंध-समर्थक देशों के साथ भारत के मतभेद पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं।
द्विपक्षीय मुलाकातें
बैठक के इतर, डॉ. जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री और फ्रांसीसी विदेश मंत्री के साथ अलग से द्विपक्षीय बातचीत की। इन बैठकों में भी ऊर्जा सुरक्षा, मिडिल ईस्ट संकट और भारत-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र में सहयोग पर चर्चा हुई।
“दुनिया को यह समझना होगा कि भारत की ऊर्जा ज़रूरतें गैर-परक्राम्य (Non-negotiable) हैं। हम भू-राजनीतिक दबाव में आकर अपने नागरिकों को अंधेरे में नहीं रख सकते।” > — विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर (G7 बैठक के बाद)





